रविवार
12 अप्रैल 2026
65-0418E
क्या परमेश्‍वर कभी अपना विचार अपने वचन के प्रति बदलता है?

प्रिय जिलाये हुए लोगों,

इस ईस्टर सप्ताहांत में उकाबों के जैसे हमारे ह्रदय ने किस तरह से ऊँची उड़ान भरी। दिन प्रति दिन उसका अभिषेक अधिक से अधिक बढ़ता गया। प्रभु भोज, दफनाया जाना, सिद्धता, उसका महान चरम बिंदु जिसके लिए उसने हमें बनाया था: यह सूर्य का उदय होना है…महिमा, वह जी उठा और हम में से प्रत्येक के अंदर जीवित है। वह हममें से प्रत्येक के लिए अपने वचन को ऐसे प्रकट कर रहा था जैसे हमने पहले कभी नहीं सुना। अभिषेक ने हमारे हृदय को भर दिया, उसकी उपस्थिति ने वातावरण को भर दिया; ऐसा लग रहा था जैसे रैपचर निकट आ गया हो।

उसने हमें बताया कि 2000 वर्ष पहले क्या हुआ था, और फिर अब 2026 में क्या हो रहा है। यीशु परमेश्वर के गेहूं का पहला दाना था जो मरे हुओं में जी उठा था। वो परमेश्वर की जिलाने वाली सामर्थ के द्वारा जी उठा था। परमेश्वर ने उसके जीवन को जिलाया, उसे मरे हुओं में से उठा कर खड़ा किया, और वह उन लोगों में से पहला फल था जो सो गए थे। वह पहला एक था जो परिपक्वता में आया, परमेश्वर का पूला जिसे परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिए स्मारक के रूप में हिलाया गया था, यह विश्वास करते हुए कि हममें से बाकी के लोग आ रहे है। यह एक चिन्ह था।

फिर उसने हमें प्रकट किया कि आज किस बात ने जगह ली है। जैसे वो पेंटीकोस्ट के दिन हिलाया गया था, जब स्वर्ग से एक लहर जैसी आवाज़ आई, एक तेज़ सनासनाती आंधी लोगों पर हिलाई गई। इसे लोगों के सामने फिर से हिलाया जा रहा था जैसा कि उसने लुका 17:30 और मलाकी 4 में प्रतिज्ञा की थी, जब मनुष्य का एस-ओ-एन पुत्र प्रकट होगा और लोगों के ऊपर फिर से हिलाया जाएगा।

अब, मनुष्य का पुत्र कौन है? “आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। और वचन देहधारी हुआ, और हमारे बीच में वास किया।“ और यदि हमारे पास जो सारी शिक्षा है, और परमेश्वर के वचन की पुष्टि; परमेश्वर के वचन के द्वारा, चिन्हों के द्वारा, अद्भुत कार्यों के द्वारा, हम आज देखते हैं, कि यहाँ लुका की—की किताब में, जैसा कि हमने अभी-अभी हवाला दिया है, या उस—उस लुका का 17वां अध्याय और 30वां पद; और मलाकी 4, और भिन्न-भिन्न वचन जिनसे हम परिचित हैं, कि वह वचन फिर से लोगों पर हिलाया गया है, कि मनुष्य की मृत परंपरायें मर चुकी हैं, और परमेश्वर का पुत्र ठीक हमारे बीच में पवित्र आत्मा के बपतिस्मे के साथ फिर से जीवित है, और हमें जीवन दे रहा है।

पवित्र आत्मा बस हमारे ऊपर हिलाता रहा और हिलाता रहा, अपने वचन को प्रकट करता रहा और प्रकट करता रहा…गतिकी, यांत्रिकी, जिलाने वाली सामर्थ…

फिर, जब ऐसा लगा कि यह इससे बढ़कर नहीं हो सकता, तो उसने हमें बताया:

उसने मुझे पर्दे के उस पार देखने दिया, और मैंने वहां आप सभी को वहां देखा… वे सभी जिसे आपने कभी प्रेम किया था, और वे सभी जिन्होंने आपसे प्रेम किया था, वे सभी आपको दिए गये हैं।“ देखा? मैंने उन सबको वहां इस तरह से देखा। यह क्या था? जिलाने वाली सामर्थ

उसने हमें वहां देखा!! समय के पर्दे के उस पार…हम वहाँ उसके साथ थे; हमारे सभी प्रियजन जो हमसे पहले चले गए…पिता, मातायें, बच्चे। हम वहां उनके साथ थे और वे सभी जिनसे हम कभी नहीं मिले थे: मूसा, एलिय्याह, पतरस, पौलुस…हम सभी वहां एक साथ थे।

फिर, ठीक जैसे कि वो प्रिय पवित्र आत्मा है, उसने हमें भूलना नहीं चाहा जो बीमार है, उदास और हताश है, इसलिए उसने खुद को फिर से हमारे ऊपर हिलाया जिससे कि हर एक जन चंगा हो सके जिसकी हमें जरूरत थी।

ये लोग, जो राज्य के साथी नागरिक हैं, जिलाने वाली सामर्थ के अधिकारी, इसे उनके लिए जिला, प्रभु, ठीक अभी। और होने पाये वो आत्मा उकाब से उकाब तक, वचन से वचन तक जाती रहे, जब तक कि यीशु मसीह की संपूर्णता प्रत्येक शरीर में प्रकट न हो जाए, शारीरिक, आत्मिक के लिए, या कोई भी आवश्यकता क्यों ना हो, जैसा कि हम एक दूसरे पर हाथ को रखते हैं। यीशु मसीह के नाम में।

वो वचन। वो आवाज़। हर एक चीज जिसकी हमें आवश्यकता है वो टेप पर है, दुल्हन। परमेश्वर अपने वचन के बारे में अपना विचार नहीं बदलता है। एक भी अंश या एक बिंदु भी नहीं बदला जा सकता, इसलिए उसने एक ऐसा मार्ग बनाया जिससे उसकी दुल्हन अपने कानों से वही सुन सके जो वह उनसे कहना चाहता था।

परमेश्वर ने अपनी दुल्हन से बात की है और सब कुछ प्रकट किया है। इसे रिकार्ड किया गया है। दुल्हन को दूल्हे के पास आना ही होगा; यही उसका सिद्ध मार्ग है जो आज के लिए बनाया गया है। प्रभु यों कहता हैं।

क्या परमेश्वर कभी अपने वचन के बारे में अपना विचार बदलता है? नहीं। उसके पास एक सिद्ध इच्छा है और एक अनुमति दी गयी इच्छा है। दुल्हन को उसकी सिद्ध इच्छा में रहना होगा। स्वयं परमेश्वर से सीधे परमेश्वर की आवाज को सुनने से बढ़कर कोई सिद्ध इच्छा या सिद्ध स्थान नहीं है।

आप सभी को मेरा आमंत्रण है कि रविवार को दोपहर 12:00 बजे जेफरसनविले के समय के अनुसार हमारे साथ जुड़ें, ताकि आप परमेश्वर की आवाज़ को सुनें जो हमारे लिए शुद्ध वचन को लेकर आती है। इसमें कोई अनुमान लगाने की ज़रूरत नहीं है, बस आराम से बैठें और हर एक वचन के लिए आमीन कहें…ऐसा करने के लिए और कोई स्थान नहीं है; यह केवल चालू करने के बटन को दबाकर ही किया जा सकता है।

भाई जोसफ ब्रंहम।

 

संदेश: 65-0418E— क्या परमेश्वर कभी अपना विचार अपने वचन के प्रति बदलता है?

हम परिच्छेद 61 से आरंभ करेंगे।

 

संदेश सुनने से पहले पढ़ने के लिए वचन:

निर्गमन 19वां अध्याय
गिनती 22:31
संत मत्ती 28:19
लूका 17:30
प्रकाशितवाक्य 17वां अध्याय